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सृष्टि रचना(Creation in Satlok)

मंगलाचरण

गरीब ,नमो नमो सतपुरुष कुं ,नमस्कार गुरु किन्ही |
सुरनर मुनिजन सधवा,संतो सर्वस दीन्ही |
सतगुरु साहिब संत सब दण्डोतम प्रणाम |
आगे पीछे मध्य हुवे ,तिन कुं जा कुर्बान |नराकार निर्विसम ,काल जाल भय भंजनं |
निर्लेपं निज निरगुणं ,अकल अनूप बेसुनन धुनं |
निज निरगुणं ,अकल अनूप बेसुनन धुनं |
सोहं सुरति समाप्तं ,सकल सामनानिरति लै|उजल हिरम्बर हरदमं बे परवाह अथाह है ,वार पार नहीं मध्तं |
गरीब जो सुमिरत सिद्ध होई ,गण नायक गलताना |
करो अनुग्रह सोइ, पारस पद परवाना |
आदि गणेश मनाऊ ,गण नायक देवन देवा|
चरण कवंल ल्यो लाऊँ,आदि अंत करहुं सेवा|
परम शक्ति संगीतं ,रिद्धि सिद्धि दाता सोइ |अबिगत गुनह अतीतं ,सतपुरुष निर्मोही |जगदम्बा जगदीसं ,मंगल रूप मुरारी |तन मन अरपुं शीशं ,भक्ति मुक्ति भंडारी |सुर नर मुनिजन ध्यावें ,ब्रम्हा विष्णु महेशा |
शेष सहंस मुख गावें, पूजे आदि गणेशा |इन्द्र कुबेर सरीखा, वरुण धर्मराय ध्यावें|
सुमरथ जीबन जीका ,मन इच्छा फल पावे |तैतीस कोटि अधारा ,ध्यावें सहंस अठासी |उतरे भब जल पारा ,कटी है यम की फांसी |

बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की जय हो| परमात्मा के सभी प्यारी आत्माओं को शिवा दास का सत साहेब |

पुणात्माओ सैकड़ो बार सतगुरु रामपाल जी महाराज के सत्संगों में सृष्टि रचना सुनी होगी | 2014 से पहले प्रकाशित सभी पुस्तके जैसे पवित्र ज्ञानगंगा ,आध्यात्मिक ज्ञानगंगा ,धरती पर अवतार ,गहरी नजर गीता में यथार्थ कबीर पंथ परिचय ,भक्ति सौदागर को सन्देश आदि | लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज ने कभी भी और कही भी इस बात का कोई उल्लेख तक नहीं किया है, की सतलोक में मैथुन क्रिया से भी संतान उत्पति होती है |

पुस्तक में मिलावट

लेकिन 2014 के बाद मानवास सतलोक मैनेजमेंट हरियाणा की एक पुस्तक जीने की राह में पेज नंबर 146 पर इस बात जिक्र अवश्य है, की सतलोक में दो तरह से संतान उत्पति होती है | पहली शब्द शक्ति से दूसरी मैथुन क्रिया से मैथुन सृस्टि का मतलब होता है| रजोगुण के प्राभाव से माता- पिता के शारीरक सम्बन्ध से बच्चे उत्पन्न होते है |(Creation in Satlok)

गुरु जी ने बताया सतलोक में हमारा सरीर 5 तत्वों से नहीं बल्कि 1 नूरी तत्वों से निर्मित होता है | वहाँ हार्ड मास और चाम कि देह नहीं है | जिसे सुक्रम अकायम अस्नावीरम भी कहा जाता है | मतलब शुक्राणु और नारी तत्व रहित शरीर है | निचे इस लेख में गुरु गई ने स्पस्ट कर दिया है | सतलोक में हमारा शरीर माता पिता के सहयोग से नहीं बना है |

परमात्मा सतगुरु रामपाल जी महाराज की वाणी

अचिंत तेरे बस का नहीं है सृस्टि रचना करना आगे से मै सब रचना स्वयं करूँगा | परमात्मा ने यह लीला इसलिए की थी | ये बालक कहीं अपना कर्म बिगड़ ले | इनकी फरक निकल दू | इनका भरम मिटा दू की समरथ ही सब कार्य कर सकता है,, जीब के बस का नहीं,अचिंत चुपचाप बैठा रहा अक्षर पुरुष वह जा करके सो गया | अचिंत के बस की बात नहीं उसको कैसे जगाउ | तो जीव ,जीब ही रहेगा और पीव ,पीव ही रहेगा |(Creation in Satlok)

परमात्मा ,परमात्म ही होता है इसलिए ,परमेस्वर ने कहा की अब तुम बिच में टाँग मत अरणा तुम्हारे बस का नहीं है कुछ भी मै स्वयं ही सब करूँगा | उसके बाद हम सभी असंख्यों आत्मा को कोअपनी बचन शक्ति से सतलोक में भर दिया | हम सभी वह आनंद से रहने लगे |वहाँ कोई दुःख नहीं था |

किसी चीज का अभाव नहीं था | सब भंडार भरे रहते है काजू किसमिस सेब संतरे वहां के जो फल है मेवा है | वो सदाबहारबाग है | अमृत आहार है | अमृत ही वहां का जल है| कोई काम नहीं ये नारी वाला शरीर नहीं है | सुक्रम अकायम असनावीरम वहां जो हमारा शरीर है बेगर स्नायु का है | ये माता पिता के संयोग से बने सुकर से बना हुवा हमारा शरीर नहीं है | तो वहां कोई रोग नहीं, किसी प्रकार का कोई कस्ट नहीं ,

निष्कर्ष

पुणात्माओ आपने गुरु जी का वचन अवश्य पढ़ा होगा की सतलोक में तेज पुंज से बने अमृत आहार है| वहां हम जो भी खाते है, वो हमारे शरीर में समां जाता है | कहने का मतलब है ,की सतलोक में अमृत आहार के बाद लैट्रिन और पेशाब नहीं करना परता है अर्थात गुदा द्वार और मूत्र द्वार है ही नहीं तो पुणात्माओ बिचार करो जब सतलोक में लैट्रिन और पेशाब के लिए गुदा द्वारऔर मूत्र द्वार है ही नहीं तो भला मैथुन से बच्चे उत्पन्न करने के लिए योनि द्वार कैसे होगा दूसरी बिचारणीये बात यह भी है की जिस समय सतलोक में काल को भगबान ने 21 ब्रम्हांड 3 गुण और 5 तत्व दिए  थे | 

उसके बाद उसने दुर्गा के युवा शरीर को देखकर काम वासना वस् होकर अपने नाखुनो से स्त्री लगानी चाही तो उसी समय परमात्मा ने उसे सतलोक से ये कहते हुए देस निकला दे दिया था | की सच्चे लोक में ये बकवाद नहीं चलती है | अब आप जी स्वयं विचार करो यदि उस सच्चे में लोक में मैथुन क्रिया होती या पहले से ही यह बकवास चल रही होती तो परमात्मा काल और दुर्गा को सतलोक से निकालने के बजाय सतलोक के उसी क्षेत्र में रख लेते जहां मैथुन सृष्टि होती है |(Creation in Satlok)

परमात्मा वचन

हम जितने भी यहां दुखी हो रहे हैं उतना ही परमात्मा हम से दुखी हैं हमारे कारण दुखी हैं अब कारण क्या था कि सतलोक में इस काल ने गलती की थी और हमने भी गलती की अपने पिता को छोड़कर यह तप कर रहा था तब इसकी तरफआसक्त हो गए हम अपने परमात्मा को छोड़कर पतिव्रता पद से गिर गए हम इसको चाहने लग गए भगवान को छोड़कर जो हमें सर्व सुख दे रहा था सारी सुविधाएं थी वहां कोई दुख नहीं था कोई काम नहीं था| 

बिना काम किए वहां सब कुछ मिलता है गलती हमने की इसका दंड हम यहां भोग रहे हैं काल के साथ यहां आ गए काल ने वहां पर एक और भयंकर गलती की जब दुर्गा युवा थी| परमात्मा ने इसको युवा बना करके इसके पास भेजा था और हम सभी आत्माओं को दुर्गा के शरीर में प्रवेश कर दिया था| सूक्ष्म रूप में और इसको कहा था की बेटी बचन से जितने चाहे जीव बना देना |

निष्कर्ष

पुण्यात्मा थोड़ा ज्ञान को आधार बनाओ भक्ति का मार्ग देखा देखी का नहीं बल्कि ज्ञान आधार का है| संगत आज बिन पेंदे के लोटे की तरह लुटती जा रही है| आखिर कब परमात्मा के ज्ञान को आधार बनाकर सतलोक जाने के काबिल बनेंगे| सत सेवकों द्वारा सतलोक में मैथुन क्रिया का विरोध किए जाने से सतलोक आश्रम मैनेजमेंट वाले की पुस्तक जिने की राह भक्तों ने बेचना छोड़ दिया है तो हाल ही में सतलोक आश्रम मैनेजमेंट गुरुजी के एक सत्संग को ढाल बनाकर संगत पर अपना एक और डोर डाला है जो चलने वाला नहीं है इन्होंने गुरुजी का एक वीडियो भेजा है |

जिसमें गुरु जी कह रहे हैं की सतलोक में दो प्रकार से काया अर्थात शरीर बनता है पहला नाद से दूसरा बिन्द से भगवान ने वहां दुर्गा के साथ बदतमीजी की थी| परमात्मा ने कहा इस सच्चे लोक में या बकवास यह बकवास बकवास नहीं चलती काल ने बलात्कार करने की सोची थी| जिसके कारण परमात्मा ने काल को सतलोक से निष्कासित कर दियापुण्य आत्माओं भले ही आप गुरुजी के इस कथन को सत्संग को पुनः एक बार सुन लेना क्योंकि गुरु जी ने जो बोल दिया है| 

वह वचन हम सत सेवकों के लिए आदि अनादि परम सत्य है लेकिन ध्यान देना इस वीडियो में गुरु जी ने केवल मिथुन जैसे गंदी क्रिया से और हमारा विरोध जीने की राह मैं केवल मिथुन क्रिया को लेकर है जब तक रहेगा तब तक की गुरु जी आश्रम में आकर स्वयं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं क्योंकि हमारा पिता कभी भी दो बड़ी बातें दोगले बातें नहीं कर सकता है|(Creation in Satlok)

 

 

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